Share Market: प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट क्या है।

प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट क्या है।: आप शेयर मार्केट मै निवेश करते है तो बार प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट के बारे मै सुना होगा। शेयर मार्केट के एक्सपेर्ट इन शब्द का इस्थमाल टीवी चैनल, न्यूज़ पेपर, सोशल मीडिया ऐसे प्लैटफ़ार्म पर करते हुये सुना होगा। 

तो आज हम सीधे प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट क्या है, प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट के बीच मै क्या फर्क है, प्राइमरी मार्केट कैसे काम करता है इसके बारे मै विस्तार से देखेंगे। 

प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट क्या है

प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट क्या है। (What is Primary and Secondary Market in Hindi)

जब कोई कंपनी का आईपीओ आता है, तो वो आईपीओ हम सीधे कंपनी से खरीदते है, जहा से आईपीओ को हम खरीदते है, उसे हम प्राइमरी मार्केट कहते है। शेयर मार्केट मै आईपीओ की लिस्टिंग NSE और BSE जैसे एक्स्चेंज पर होती है, वहा से हम शेयर को खरीदते और बेचते है उसे सेकेंडरी मार्केट कहते है। 

प्राइमरी मार्केट 

नई सेक्यूरिटीस जैसे आईपीओ, बॉन्ड ये गवर्नमेंट या प्राइवेट कंपनी के ध्वारा पहिली बार पब्लिक को बेची जाती है, ये सब पहिली बार जारी होता है, और हम सीधे गवर्नमेंट, प्राइवेट कंपनी से खरीदते है उसे प्राइमरी मार्केट कहते है। 

प्राइवेट मार्केट मे सीधे कंपनी और निवेशक के बीच मै डील होती है, इसमे आईपीओ, राइट टु इशू,  प्राइवेट प्लेसमेंट, सोवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे शामिल है। 

सेकेंडरी मार्केट

जब कोई आईपीओ आने के बाद उसकी लिस्टिंग स्टॉक एक्स्चेंज पर होती है, और स्टॉक एक्स्चेंज से हम उस कंपनी के शेयर खरीदते और बेचते है, उसे सेकेंडरी मार्केट कहते है। 

स्टॉक एक्स्चेंज मै NSE (नेशनल स्टॉक एक्स्चेंज) और BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज) ये मुख्य तौर पर काम करते है। NSE और BSE पर हम डेलि शेयर की खरीद और विक्री करते रहते है, हम जीतने भी शेयर NSE और BSE पर खरीदते है, ये सेकेंडरी मार्केट से खरीद और बेचते है। 

सेकेंडरी मार्केट को हम आफ्टर मार्केट भी कहते है। 

सेकेंडरी मार्केट मै हम आरबीआई के ध्वारा जारी की गई सेक्यूरिटीस भी खरीद सकते है, जैसे की सोवरेन गोल्ड बॉन्ड है, उसे हम सेकेंडरी मार्केट मे खरीद और बेच सकते है। 

प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट में क्या फर्क है।

प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट क्या है, इसके बारे मै हमने जाना, अब हम इन दोनों मै क्या फरक है इसके बारे मै जान लेते है। 

प्राइमरी मार्केट  सेकेंडरी मार्केट
प्राइमरी मार्केट ये वो मार्केट होता है, जहा पर गवर्नमेंट और प्राइवेट कंपनी अपना आईपीओ, सेक्यूरिटीस, राइट टु इशू, बॉन्ड सीधे निवेशको को बेचती है।  सेकेंडरी मार्केट आईपीओ, सेक्यूरिटीस, बॉन्ड की लिस्टिंग होती है, और पब्लिक उसके share को खरीद और बेच सकते है। 
प्राइमरी मार्केट मै कंपनी के आईपीओ, गवर्नमेंट के बॉन्ड को बैंक, डिमेट अकाउंट के जरिये खरीदा जाता है।   सेकेंडरी मार्केट मै स्टॉक एक्स्चेंजस(NSE, BSE) के ध्वारा स्टॉक, बॉन्ड को खरीदा और बेचा जाता है। 
प्राइमरी मार्केट को हम न्यू इशू मार्केट (NIM) खाते है।  सेकेंडरी मार्केट को हम आफ्टर मार्केट भी कहते है
प्राइमरी मार्केट मै हम सेक्यूरिटीस को डाइरैक्ट खरीदते है।  सेकेंडरी मार्केट मै सेक्यूरिटीस को इंडिरेक्ट खरीदते है। 
प्राइमरी मार्केट मै खरीदी और बिक्री डाइरैक्ट इन्वैस्टर और कंपनी के बीच मै होती है।  सेकेंडरी मार्केट मै खरीदी और बिक्री इन्वैस्टर के बीच मै होती है। 
प्राइमरी मार्केट मै कीमत फिक्स रहती है।  सेकेंडरी मार्केट मै किमते कम ज्यादा होती रहती है। 

प्राइमरी मार्केट कैसे काम करता है। 

जब कोई कंपनी को अपना बिज़नस को आगे बढ़ाने के लिए पैसे की जरूरत होती है, तो वो कंपनी सीधे इन्वैस्टर और पब्लिक से पैसे उठाती है। इसी तरह गवर्नमेंट को पैसे की जरूरत है, तो ये गवर्नमेंट अपने कंपनी का कुछ हिस्सा पब्लिक को बेचती है। इन सबको हम प्राइमरी मार्केट कहते है। 

जब प्राइवेट कंपनी रहती है, तो इन्वैस्टर सीधे उस कंपनी को अप्प्रोच करके उसकी इक्विटि खरीद सकता है, और जब कोई इन्वैस्टर को कोई कंपनी से अपना हिस्सा बेचना है, तो वो सीधा कंपनी को वापस बेच सकता है। उसके बाद कंपनी अपनी 3 साल की वैल्यूशन सेबी से सबमिट करके आईपीओ लाने की परवानगी लेता है, और बाद मै इन्वैस्टर उस आईपीओ को खरीद लेते है। ये जितनी भी लेन देन डाइरैक्ट कंपनी से होती है, उसे हम प्राइमरी मार्केट कहते है, 

गवर्नमेंट कंपनी मै आप कोई भी इन्वैस्टर डाइरैक्ट इक्विटि खरीद नहीं सकता, इसके लिए कंपनी पीछले 3 साल वैल्यूशन सेबी से मंजूर करके अपना आईपीओ मार्केट मै लेके आती है, इन्वैस्टर उस आईपीओ को बैंक, ब्रोकर के जरिये अप्लाई कर सकते है। 

जब आरबीआई बॉन्ड इशू करता है, तो उसे हम डाइरैक्ट बैंक, पोस्ट ऑफिस, ब्रोकर के जरिये खरीद सकते है। 

इस तरह प्राइवेट और गवर्नमेंट कंपनी मै प्राइमरी मार्केट काम करता है। 

आईपीओ प्राइमरी है या सेकेंडरी मार्केट?

IPO का मतलब है, इनिश्यल पब्लिक ऑफरिंग जब कोई कंपनी का आईपीओ मार्केट मै आता है, तो ये आईपीओ प्राइमरी मार्केट मै आता है, उसे हम बैंक, डिमेट अकाउंट के जरिये खरीद सकते है। आईपीओ की जब लिस्टिंग होती है, उसके बाद उसे हम स्टॉक एक्स्चेंज पर बेच सकते है, उसे सेकेंडरी मार्केट कहते है। 

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